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यूक्रेन से अपने घर कोटरा बहादुरगंज पहुंचा छात्र

सारा समय न्यूज डेस्क

ऊँचाहार-यूक्रेन में लगातार हो रहे हमले से देश में दहशत के बीच जी रहे मेडिकल के भारतीय छात्रों के एक समूह में शामिल छात्र आखिरकार जद्दोजहद के बाद अपने-अपने घर पहुँच गया।
क्षेत्र के कोटरा बहादुरगंज निवासी छात्र शुक्रवार को सुरक्षित अपने घर पहुँच गया। छात्र के घर पहुँचते ही उदास परिजनों के चेहरे खुशी से खिल गये। अखिलेश के घर पर मिलने वाले गाँव के लोगों और रिश्तेदारों का ताँता बंधा रहा। छात्र अखिलेश के परिजनों ने भारत सरकार को धन्यवाद दिया।
क्षेत्र के कोटरा बहादुरगंज निवासी सत्यनारायण जो इलाहाबाद हाई कोर्ट में अधिवक्ता हैं। उनका पुत्र अखिलेश कुमार युक्रेन देश में रह कर मेडिकल की पढ़ाई करता है । बीते दिनों से युक्रेन देश में रूस के हमले से स्थिति बिगड़ गई। हमले की सूचना पूरे युक्रेन मुल्क में आग की तरह फैल गई जिससे वहाँ सनसनी का मच गई चारों ओर डर व दहशत का माहौल बन गया। इस माहौल में जद्दोजहद के बाद अखिलेश अपने घर पहुँच गया। अखिलेश कुमार मौर्य ने बात-चीत में बताया कि वह वर्ष 2019 में युक्रेन मुल्क की सूमी स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई करने भारत से युक्रेन गया था वर्ष 2022 में एमबीबीएस की तृतीय वर्ष की पढ़ाई में प्रयासरत था कि तभी युक्रेन में रूस के हमले से वहाँ के हालात बिगड़ गए चारों ओर डर व दहशत फैल गई । बीते माह फरवरी को यूनिवर्सिटी से करीब 500 मीटर की दूरी पर हमले के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने छात्रों के सुरक्षा की दृष्टिकोण से पढ़ाई ऑनलाइन करा दी लेकिन दूसरा हमला यूनिवर्सिटी के आवासीय परिसर पर होने के बाद पढ़ाई पर पूर्ण रूप से विराम लग गया। बाहर निकलना बन्द हो गया। खाना और पानी फ़िलहाल डंप कर लिया गया। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने हमले की आशंका के मद्देनज़र समस्त छात्रों को बंकर में भेज दिया स्थिति जब सामान्य हो जाती तब बंकर से बाहर निकाल लिये जाते। अखिलेश ने बताया की भारतीय दूतावास द्वारा समय-समय एडवाइजरी जारी कर जानकारी दी जाती थी लेकिन छात्रों को वहाँ से निकालने के लिए कोई प्रबंध नहीं किया जा रहा था। छात्रों ने जब वीडियो बनाकर इन्टरनेट मीडिया पर वायरल किया तो भारतीय दूतावास हरकत में आई और उन्हें निकालने के लिए दो दिन का समय मांगा। इस दौरान हमला पानी की सप्लाई व्यवस्था पर भी हो गया। खाने की समस्या तो थी ही अब पानी पीने की समस्या हो गई। यह समस्या मुसलसल बनी रही अंततः दो दिन बाद वह समय आ ही गया जब भारतीय दूतावास ने वहाँ से निकालने के लिए साधन मुहैय्या कराया किन्तु उसी दिन फिर से हमला होने पर वहाँ की एक समाज सेवा संगठन ने उस दिन निकलने के लिए रोक दिया अगले दिन स्थानीय मेयर व समाजसेवा संगठन ने स्थानीय पुलिस मुहैय्या कराकर उन्हें जरिए ट्रेन दूसरे शहर भेजा और फिर वहाँ से हवाई यात्रा से पोलैंड देश भेजा। जहाँ पहुँच कर छात्रों ने राहत की साँस ली इसके साथ ही वहाँ खाने की व्यवस्था कराई गई। इस बीच इधर डीएम समेत स्थानीय अधिकारियों ने छात्र अखिलेश के परिजनों से सम्पर्क बनाये रखा और उन्हें आश्वासन देते रहे और छात्र की खबर परिवार वालों को देते रहे। आखिरकार काफी जद्दोजहद के बाद अखिलेश को सरकारी ख़र्चे पर घर तक पहुँचाया गया।

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