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अनसुलझी ही रह गई अपराध की उलझी गुत्थी,पुलिसिया कार्यवाही पर सवाल?

सारा समय मीडिया
ऊंचाहार रायबरेली।ऊंचाहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा हो रहा है ,सवाल ये भी की कहीं अपराधियों पर पुलिस का संरक्षण तो नही?
सवाल इसलिए कि कई अपराधिक मामलों की गुत्थी आज भी उलझी और अनसुलझी ही है।
तो चलिए उलझे हुए आंकड़ों पर भी प्रकाश डाला जाए –
अभी हाल में ही एक दिन में चोरी छिनैती जैसी कई वारदातें हो गई और पुलिस हांथ मलती रह गई।
बीती 13 मार्च को लखनऊ प्रयागराज राजमार्ग पर ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र की बाबूगंज बाजार की तीन दुकानों में सेंध काटकर चोरों ने लाखों का माल पार कर दिया बाबूगंज की इस वारदात में प्रमुख चोरी अमित ओझा के मोबाइल शॉप में हुई,मामले की छानबीन करने ऊंचाहार पुलिस घटना स्थल पर पहुंची ही थी कि कोतवाली से कुछ ही दूरी पर स्थित रेलवे कालोनी में पूजा के लिए मंदिर गई बृजेश पांडेय की पत्नी के साथ बाइक सवार स्नेचरों ने चैन स्नेचिंग की वारदात को अंजाम दे दिया।
एक दिन में हुई लगातार चार वारदातों से समूचा कोतवाली क्षेत्र दहशत में था लेकिन पुलिस अपनी ही रफ्तार में चल रही थी।
उक्त वारदातों को हुए लगभग दो सप्ताह का समय बीत गया लेकिन पुलिस टीम के हांथ खाली ही हैं।
ये तो छोड़िए जरा फ्लैश बैक में जाइए बीती 21 जून की रात कोतवाली क्षेत्र के गोकर्ण गंगा तट की चांदी बाबा कुटी से चोरों ने अष्ट धातु से निर्मित मूर्तियों की चोरी कर ली ,इन मूर्तियों की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों में बताई जा रही है ।इस घटना में पुलिस हाई कमान के निर्देशों पर कई पुलिस टीमें गठित हुई लेकिन आज भी नतीजा शून्य ही है।
उक्त घटनाएं तो महज बानगी मात्र हैं तमाम अपराधिक वारदाते पुलिस फाइलों में आज भी खाक छान रही हैं।
हालाकि पुलिस अधिकारी आज भी जल्द ही घटनाओं के खुलासे का रटा रटाया बयान देने से पीछे नहीं हट रहे हैं।
लेकिन उक्त मामलों ने पुलिसिया कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है यानी की कार्यशैली सवालों के घेरे में है?

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