ऊंचाहार में अवैध खनन की आड़ में वसूली का कथित खेल! सरकारी गाड़ी से पहुंचे फर्जी अधिकारी, 30 हजार में छूटीं दो मोटरसाइकिलें?
रातभर चला कथित छापेमारी और वसूली का खेल, तहसील के संविदाकर्मी कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका पर उठे सवाल; तहसीलदार बोले- मामले की जानकारी नहीं, कराई जाएगी जांच
सारा समय मीडिया
ऊंचाहार, रायबरेली। ऊंचाहार तहसील क्षेत्र में अवैध खनन के नाम पर कथित वसूली और फर्जी अधिकारियों के सक्रिय होने का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि रात के अंधेरे में तहसील की सरकारी बोलेरो गाड़ी का इस्तेमाल कर कुछ लोग अधिकारी बनकर पूरे कुशल पानी की टंकी के पास पहुंचे और पूरी रात कथित तौर पर कार्रवाई के नाम पर अपना खेल खेलते रहे।
सूत्रों के मुताबिक, मौके पर अवैध खनन में इस्तेमाल हो रहे वाहन तो वहां से निकलने में कामयाब रहे, लेकिन दो मोटरसाइकिलें कथित तौर पर इन लोगों के कब्जे में आ गईं। इसके बाद शुरू हुआ कथित सौदेबाजी और सांठगांठ का खेल। आरोप है कि सुबह होते-होते तहसील में संविदा पर तैनात एक कंप्यूटर ऑपरेटर के माध्यम से दोनों मोटरसाइकिलों को छोड़ने के लिए 30 हजार रुपये में सौदा तय हुआ और रकम मिलने के बाद मोटरसाइकिलें छोड़ दी गईं।
मामले में यह भी आरोप है कि छापेमारी के दौरान चार अन्य निजी व्यक्ति शामिल थे, जो खुद को नायब तहसीलदार और तहसीलदार बताकर कार्रवाई कर रहे थे। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल अवैध वसूली का मामला नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग और प्रशासनिक व्यवस्था की साख से जुड़ा गंभीर सवाल है।
संविदाकर्मी कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका पर सवाल
सुबह जब मीडिया टीम ने पूरे घटनाक्रम की पड़ताल शुरू की तो तहसील में संविदा पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर अंकज का नाम सामने आया। आरोप है कि वह पूरे घटनाक्रम की अगुवाई कर रहा था। हालांकि अंकज ने मामले में शामिल होने से मना किया ।
घटना में तहसील में प्रयुक्त होने वाली सरकारी बोलेरो गाड़ी का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि संबंधित वाहन कई सीसीटीवी कैमरों में कैद हुआ है।
मीडिया टीम ने जब कंप्यूटर ऑपरेटर अंकज से इस संबंध में बात की तो उन्होंने बताया कि छापेमारी में तहसीलदार साहब गए थे। जबकि दूसरी ओर तहसील के जिम्मेदार अधिकारियों को कथित कार्रवाई की जानकारी तक नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में कंप्यूटर ऑपरेटर के बयान और अधिकारियों की अनभिज्ञता के बीच कई सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में तहसील के एक अन्य जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है।
तहसीलदार बोले- जानकारी नहीं, कराई जाएगी जांच
इस पूरे प्रकरण पर तहसीलदार सुनील कुमार से बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें ऐसे किसी मामले की जानकारी नहीं है। हालांकि उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही है।
अब सबसे बड़ा सवाल- सरकारी गाड़ी किसके आदेश पर गई?
यदि पूरे घटनाक्रम में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह ऊंचाहार तहसील की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। आखिर सरकारी बोलेरो का इस्तेमाल किसके आदेश पर हुआ? निजी लोग किसके संरक्षण में तहसीलदार और नायब तहसीलदार बनकर पहुंचे? अवैध खनन में लगे वाहन निकल कैसे गए और दो मोटरसाइकिलें छोड़ने के बदले कथित तौर पर 30 हजार रुपये किसने लिए?
फिलहाल मीडिया संस्थान इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। मामले की निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होना बेहद जरूरी है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस कथित खेल की तह तक पहुंचकर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करता है या मामला जांच के नाम पर फाइलों में ही सिमटकर रह जाता है।

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