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डेढ़ लाख की कथित अवैध वसूली के बाद बिजली चोरी कराने का आरोप

डेढ़ लाख की कथित अवैध वसूली के बाद बिजली चोरी कराने का आरोप, ऊंचाहार में विद्युत विभाग पर उठे गंभीर सवाल ग्रामीण ट्रांसफार्मर को निजी ट्यूबवेल के लिए शिफ्ट करने की चर्चा...

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डेढ़ लाख की कथित अवैध वसूली के बाद बिजली चोरी कराने का आरोप, ऊंचाहार में विद्युत विभाग पर उठे गंभीर सवाल

ग्रामीण ट्रांसफार्मर को निजी ट्यूबवेल के लिए शिफ्ट करने की चर्चा से बढ़ा विवाद; SDO आशीष कुमार ने आरोपों को बताया बेबुनियाद, कहा—शिकायत की जांच कराई जा रही है

सारा समय न्यूज नेटवर्क | रायबरेली

ऊंचाहार। घरेलू बिजली कनेक्शन से ट्यूबवेल चलाने के आरोप से शुरू हुआ विवाद अब विद्युत विभाग के स्थानीय अधिकारियों पर कथित अवैध वसूली के गंभीर आरोपों तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ता संजय तिवारी ने दावा किया है कि स्थानीय विद्युत विभाग के SDO डेढ़ लाख रुपये की कथित अवैध वसूली कर बिजली चोरी करवा रहे हैं। दूसरी ओर, SDO आशीष कुमार ने इन आरोपों को बेबुनियादी बताते हुए कहा है कि मामले की शिकायत मिली है और जांच कराई जा रही है। ऐसे में सवाल है कि जांच में आरोपों की सच्चाई सामने आएगी या मामला महज आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाएगा?

दो किलोवाट के घरेलू कनेक्शन पर ट्यूबवेल चलाने का आरोप

मामला रायबरेली के ऊंचाहार थाना क्षेत्र के रोहनिया फीडर अंतर्गत ब्रह्मजीतपुर और हमीदपुर-बड़ागांव क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, जितेंद्र तिवारी उर्फ भुल्लन डाकिया पर दो किलोवाट के घरेलू कनेक्शन से ट्यूबवेल चलाकर खेतों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने का आरोप है। इस संबंध में वीडियो प्रसारित होने की भी चर्चा है। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता और बिजली कनेक्शन के वास्तविक उपयोग की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि यदि घरेलू कनेक्शन का इस्तेमाल स्वीकृत शर्तों के विपरीत कृषि कार्य के लिए किया जा रहा है, तो विभाग को निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिजली के अनधिकृत उपयोग की स्थिति में संबंधित उपभोक्ता के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

ग्रामीण ट्रांसफार्मर की शिफ्टिंग पर भी सवाल

विवाद का दूसरा पहलू ग्रामीण ट्रांसफार्मर को कथित तौर पर ऐसी जगह स्थानांतरित करने की चर्चा है, जहां शिकायतकर्ता के अनुसार कोई मकान नहीं बना है। उनका दावा है कि प्रस्तावित स्थान पर ट्रांसफार्मर शिफ्ट होने से निजी ट्यूबवेल को लाभ मिल सकता है, जबकि आसपास के दर्जनों घरों की बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है।

शिकायत में SDO आशीष कुमार, जेई अभिनीश कुमार और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि ट्रांसफार्मर स्थानांतरण की जरूरत, तकनीकी औचित्य, प्रस्तावित स्थान और इससे प्रभावित होने वाले उपभोक्ताओं की संख्या की जांच कराई जाए।

डेढ़ लाख रुपये के आरोप की जांच जरूरी

शिकायतकर्ता संजय तिवारी द्वारा लगाए गए डेढ़ लाख रुपये की कथित अवैध वसूली के आरोप गंभीर हैं। हालांकि, फिलहाल इस आरोप के समर्थन में कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित साक्ष्य सामने नहीं आया है। इसलिए इसकी पुष्टि जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकती है।

SDO आशीष कुमार ने आरोपों को बेबुनियादी बताते हुए कहा कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच कराई जा रही है। उनका यह पक्ष भी मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घरेलू कनेक्शन का उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा था, ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने का कोई प्रस्ताव है या नहीं और कथित वसूली के आरोपों में कितनी सच्चाई है।

मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता संजय तिवारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने घरेलू बिजली कनेक्शन से कथित तौर पर ट्यूबवेल चलाने, डेढ़ लाख रुपये की कथित अवैध वसूली और ग्रामीण ट्रांसफार्मर को निजी उपयोग के लिए स्थानांतरित किए जाने के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि किसी भी निर्दोष उपभोक्ता को परेशानी न हो और यदि नियमों का उल्लंघन या भ्रष्टाचार प्रमाणित होता है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या बिजली विभाग की जांच में घरेलू कनेक्शन के कथित दुरुपयोग और डेढ़ लाख रुपये की कथित वसूली के आरोपों की सच्चाई सामने आएगी? फिलहाल अधिशाषी अभियंता शिवम रंजन ने जांच कराने की बात कही है। जांच रिपोर्ट, संबंधित अभिलेख और विभाग का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।

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